वर्ष, महीने और दिन,
सदियाँ और पल-छिन,
आते हैं और जाते हैं,
बहुत कुछ हम पाते हैं,
लेकिन, सब कुछ है बेकार,
न मिले यदि अपनों का प्यार।
सह सकते हैं हम हर अभाव,
बस, न मिले किसी सम्बन्ध के टूटने का घाव।
-हेमन्त 'स्नेही'
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कविता के अनुर्वर प्रदेश की ज़रख़ेज़ ज़मीन
5 years ago