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Friday, May 29, 2009

प्यार है अनमोल (चार मुक्तक)

प्यार हर सम्बन्ध का आधार है;
प्यार से मन को मिला विस्तार है;
ज़िन्दगी निःसार है बिन प्यार के,
प्यार जीवन का सहज सिंगार है।
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प्रेम-पथ की यात्रा अविराम है;
सार्थक लेकिन सदा निष्काम है;
प्यार का अभिप्राय चंचलता नहीं,
प्यार अविचल साधना का नाम है।
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प्यार है अनमोल धन स्वीकार कर;
मत कभी इस सत्य से इनकार कर;
क्या पता भगवान कब किसको मिले,
बस अभी इंसान से तू प्यार कर।
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प्यार अपने ही हृदय का ज्ञान है;
प्यार जीवन का अटल विज्ञान है;
प्यार को पूजा समझना चाहिए,
प्यार प्रभु का श्रेष्ठतम वरदान है।
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-हेमन्त 'स्नेही'

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Wednesday, December 31, 2008

वर्ष, महीने और दिन

वर्ष, महीने और दिन,
सदियाँ और पल-छिन,
आते हैं और जाते हैं,
बहुत कुछ हम पाते हैं,

लेकिन, सब कुछ है बेकार,
न मिले यदि अपनों का प्यार।
सह सकते हैं हम हर अभाव,
बस, न मिले किसी सम्बन्ध के टूटने का घाव।

-हेमन्त 'स्नेही'
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